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    Thursday, 23 March 2017

    यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एन्टी-रोमियो स्क्वाड के साथ बिताए 90 मिनट का लेखा-जोखा...

    यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एन्टी-रोमियो स्क्वाड के साथ बिताए 90 मिनट का लेखा-जोखा...लखनऊ: दोपहर बाद लगभग 4 बजे का वक्त... उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के व्यस्ततम और सबसे पोश बाज़ार हज़रतगंज की सड़कों पर घूम रहा है एन्टी-रोमियो स्क्वाड - एक उपाधीक्षक, यानी डीएसपी, के नेतृत्व में लगभग 30 पुलिसवाले, जिनमें पांच महिला कॉन्स्टेबल भी हैं...

    ये पुलिसवाले चारों ओर घूम रहे हैं, और ऐसे लोगों को तलाश कर रहे हैं, जो लड़कियों-महिलाओं को परेशान कर सकते हैं, यानी 'रोमियो' (महिलाओं से छेड़छाड़ करने वालों को आमतौर पर इसी नाम से पुकारा जाता है) हो सकते हैं...

    जो लड़के अकेले बैठे हैं, या ग्रुप बनाकर टहल रहे हैं, इन पुलिसवालों की नज़र में सबसे पहले आ जाते हैं... एक गली में अपनी मोटरसाइकिल पर अकेले बैठे नीरज को इनमें से पांच पुलिसवालों ने 'घेर' लिया, और पुलिस अधिकारी ने सवाल दागा, "यहां क्यों बैठे हो...? क्या यह पिकनिक स्पॉट है...?"

    बुदबुदाते-से नीरज ने जवाब दिया, "मैं पास के ही रेस्तरां में काम करता हूं...", और बताया कि उसकी शिफ्ट अभी-अभी खत्म हुई है, सो, घर लौटने से पहले कुछ देर सांस लेना चाहता हूं...

    नीरज का आधार कार्ड चेक करने वाले पुलिसकर्मी ने गुर्राकर कहा, "यहां बेवजह बैठने की कोई ज़रूरत नहीं..." सादे कपड़े पहने एख अन्य पुलिसवाले ने अपने मोबाइल फोन से नीरज की तस्वीर खींची, और जब उन्हें तसल्ली हो गई कि कोई 'गड़बड़' नहीं है, न हो सकती है, वे आगे बढ़ गए...

    नीरज इस घटना से हिल गया, और उसने हमसे बात तक करने से इंकार कर दिया...

    ...और, कुछ ही देर बाद, एन्टी-रोमियो अभियान में चीज़ें कुछ आक्रामक रूप अख्तियार कर लेती हैं...

    दुकानों के एक ब्लॉक के साथ पुलिसवाले साद खान को घेर लेते हैं, जो एक बेंच पर अकेले बैठा है... साद ने पुलिस को बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ आया है, जो महिलाओं की पोशाकों की दुकान में खरीदारी कर रही हैं...

    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की ओर से सवाल दागा जाता है, "तुम दुकान में भीतर क्यों नहीं गए...?" इससे पहले कि साद कोई जवाब दे पाता, उसकी पत्नी नाज़िरा दुकान से बाहर निकलकर आती है, और पति से कहती है "आओ, चलें..."

    पुलिसवाले तुरंत आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन नाज़िरा तब तक गुस्से से भर चुकी है... "इसे परेशान करना कहते हैं... यह हमारे साथ हर दुकान के भीतर नहीं जा सकते... यह दुकान महिलाओं के लिए हैं... आप इनसे नहीं पूछ सकते कि यह यहां क्यों बैठे हैं... अगर यह शराफत से दुकान के बाहर खड़े हैं, तो इसमें परेशानी क्या है...?"

    हाल ही में चुनाव में शानदार जीत हासिल कर सत्तासीन हुई भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के चुनावी वादों में से एक 'एन्टी-रोमियो स्क्वाड' की शुरुआत बुधवार को कुछ गलत हो गई, जब टीवी पर दिख रही तस्वीरों में पुलिसवालों को युवा जोड़ों और ग्रुप में घूम रहे पुरुषों को परेशान करते देखा गया... नवनियुक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इसके बाद निर्देश देना पड़ा कि जोड़ों को निशाना नहीं बनाया जाए...

    बहरहाल, यह साफ नहीं है कि पुलिस के पास सार्वजनिक स्थानों पर 'रोमियो' को पकड़ने के लिए क्या योजना है, लेकिन फिलहाल एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, उनका इरादा "कॉलेजों और अन्य जगहों पर अकेले और ग्रुपों में घूम रहे लड़कों से सवाल करने और उनकी जांच करने का है, ताकि छेड़छाड़ का इरादा रखने वालों के मन में भी डर पैदा हो..."

    पुलिसवालों का यह ग्रुप इसी बाज़ार में लगभग 30 मिनट और बिताता है, लेकिन कोई 'रोमियो' हाथ नहीं आता... किसी को भी हिरासत में नहीं लिया गया...

    इस टीम में मौजूद वरिष्ठतम पुलिस अधिकारी शिवराम यादव हमें समझाने की कोशिश करते हैं कि क्यों वे अकेले पाए जा रहे पुरुषों से पूछताछ कर रहे हैं... "हम पूछते हैं, क्या यह गलत है...? क्या किसी से यह पूछना गलत है कि वह अकेला क्यों घूम रहा है...? अगर वह दुकान पर आया है, तो ठीक है... लेकिन अकेले घूमने का क्या मतलब है...? मैं नहीं समझ सकता कि आप अकेले क्यों बैठे रहना चाहेंगे... आप यहां एक मकसद - खरीदारी - से आए हैं न...?"

    ...तो क्या हर अकेले घूमने वाले को घेर लेना जायज़ है...? अधिकारी का जवाब था, "अकेले घूमने वाले से बात किए बिना कोई कैसे बता सकता है कि वह असल में कौन है...?"

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