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    Thursday, 23 March 2017

    इटावा में चिकन पर ज़िंदा हैं 'मुलायम के शेर'

    अवैध बूचड़खाने बंद करने संबंधी सरकारी फ़रमान ने इटावा स्थित लॉयन सफ़ारी के शेरों के लिए भी मुश्किल खड़ी कर दी हैं. यहां के शेर पहले ही जीवन संकट के दौर से गुज़र रहे थे, अब उन्हें खाने के भी लाले पड़ गए हैं.
    दरअसल, इन शेरों को पेट भरने के लिए भैंसे का मांस दिया जाता था. लेकिन बदली परिस्थितियों में ज़िंदा रहने के लिए इन्हें बकरे के मांस से ही काम चलाना पड़ रहा है.
    नहीं मिल रहा भैंस का मांस
    इटावा सफारी पार्क के उप निदेशक डा. अनिल कुमार पटेल का कहना है, "सफ़ारी पार्क में 6 युवा और 2 शावकों समेत कुल आठ शेर हैं जिन्हें भोजन के रूप में भैंस के बच्चों का मांस दिया जाता रहा है. लेकिन दो-तीन दिन से इस तरह की मांस की उपलब्धता न होने की वजह से शेरों और शावकों को बकरे और मुर्गे का मांस दिया जा रहा है."
    पटेल ने ये भी बताया कि यह समस्या अकेले इटावा की ही नहीं है बल्कि लखनऊ और कानपुर स्थित चिड़ियाघरों के शेर भी इस समस्या से जूझ रहे हैं. उनका कहना था कि इसे जल्दी ही दूर करने की कोशिश की जा रही है.
    लॉयन सफ़ारी में शेरों के लिए गोश्त सप्लाई करने वाले ठेकेदार हाजी निज़ाम का कहना है कि भैंस का गोश्त न मिल पाने की वजह से शेरों के लिए हर दिन 50 किलो बकरे का गोश्त भेजा जा रहा है जिसे रोज़ दे पाना बड़ा मुश्किल हो रहा है.
    हाजी निज़ाम के मुताबिक, "ऐसा करने से हमें बहुत घाटा हो रहा है लेकिन शेर भूखे न मरें, इसलिए हम बकरे का गोश्त उपलब्ध करा रहे हैं. पर हम यह नहीं बता सकते कि ऐसा कितने दिन कर पाएंगे. हमारी अपील है कि राज्य सरकार कम से कम इन शेरों के लिए तो भैंस का गोश्त उपलब्ध कराने की इजाज़त दे दे."
    इटावा समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव का गृह जनपद है. इसे पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए मुलायम सिंह यादव और बाद में अखिलेश यादव ने लॉयन सफ़ारी का ड्रीम प्रोजेक्ट शुरू किया. लगातार शेरों की मौत के चलते भी यह प्रोजेक्ट अक़्सर चर्चा में रहा है.
    इटावा सफारी पार्क की व्यवस्था को देखने के लिए एक कमेटी बनी है, जिसके पदेन अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री हैं. इसके अलावा प्रदेश के वन सचिव समेत कई अधिकारी भी इस कमेटी में शामिल हैं.
    इटावा के पत्रकार दिनेश शाक्य कहते हैं कि सफ़ारी के रखरखाव के लिए समाजवादी पार्टी ने सौ करोड़ रुपये का एक फिक्स्ड डिपॉजिट भी करा रखा है ताकि किसी अन्य सरकार की अनदेखी की स्थिति में इसके ब्याज से यहां का ख़र्च चलता रहे.
    बहरहाल, इटावा सफारी पार्क का क्या भविष्य होगा ये तो लखनऊ में नए निज़ाम तय करेंगे लेकिन यहां के शेर ज़रूर सोच रहे होंगे कि पहले तो मौसम और बीमारी उनके लिए ख़तरा बने और अब उनके राशन पर ही हमला हो रहा है.
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